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असुर सदैव बली रहेंगे, क्योंकि सुर तो केवल किसी के भरोसे हैं. ऋत् पर ही सही, निर्भर हैं. और असुर, - दुरभिसंधि मैं लगे ही सही- निरंतर कर्म- तत्पर हैं. - अज्ञेय

Wednesday, 16 March 2011

गरीब की हो_ली


रामजीलाल की घरवाली की चिंता
दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही थी
घर का राशन
सास की बीमारी
बड़की की शादी
छुटकी की स्कूल
और ऊपर से ये त्योहार
उसने अपने रोते हुए बच्चे को
जो किसी खिलौने की ज़िद कर बैठा था
ये कहकर चुप करा दिया था
कि दस दिन बाद जब होली आएगी
वो उसे एक सुंदर-सा खिलौना दिलाएगी
गरीब के बच्चे का धीरज बड़ा होता है
मा की इस बात ने बच्चे पर जादू का सा असर किया
और वो चुप्प हो गया
उस दिन के बाद बच्चे ने कभी ज़िद नहीं की परंतु
जैसे-जैसे होली का दिन नज़दीक आ रहा है
जाने क्यूं मा अंदर ही अंदर घुट-सी रही है
जिस पल से बच्चा चुप हुआ है
मा की मौन व्यथा कई गुना बढ़ गई है
लो होली तो आ गई.

2 comments:

  1. घर आकर मां बाप, रोये बहुत अकेले में
    मिट्टी के खिलौने भी, महंगे बहुत थे मेले (दुष्यंत कुमार)

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  2. garib ke bache ka dheeraj bada hota he. wah kya pankti di he aapne is kavita me. sabse marmik pankti he is kavita ki. bahut achhe brother.

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