एक आधुनिक टाइप का शहर था. शहर के विश्वविद्यालय में एक लड़का और एक लड़की पढ़ते थे. हां और भी कई लड़के-लड़कियां पढ़ते थे परंतु हमारी कोशिश इस घटना को कहानी बनाने से बचाने की है. हां तो एक लड़का और एक लड़की. दोनों जवान थे और लड़की खूबसूरत भी थी. लड़के की जवानी और लड़की की खूबसूरती किसी भी घटना के लिए पर्याप्त कारण है. तो फिर इस पर मत जाइए कि लड़का खूबसूरत था कि नहीं. हां तो आगे बढ़ते हैं. दोनों के बीच वही हुआ जो प्रसाद जी की कामायनी में मनु और श्रधा के बीच होता है, हां वही, प्यार. यहां पर थोड़ा-सा क्षेपक है. बाकी प्रेम कहानियों से हटकर दोनों की शादी हो जाती है. चूंकि ये कहानी नहीं है इसलिए प्यार से शादी के बीच की बाधादौड़ हटा दी गई है. अभी शादी को सालभर ही हुआ था कि लड़का एक सरकारी नौकरी पाकर सुदूर असम में नियुक्त हो जाता है. भावुकता पूर्ण विदाई के बाद लड़की विश्वविद्यालय में पढ़ाई जारी रखती है और लड़का असम में नई जिम्मेदारियां निभाता है.
लगभग छह महीने बाद-
लड़का छुट्टी लेकर उसी शहर में लौटकर आता है. रात के लगभग ग्यारह बजे वह शहर के स्टेशन पर उतरता है. यहां कुछ बातें जान लेना जरूरी है क्योंकि किसी भी घटना के लिए कुछ जरूरी परिस्थितियां होती है जिनको जाने बिना बात की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है. जानने योग्य बातों में सबसे पहली बात; लड़की विश्वविद्यालय के होस्टल में रहती थी. दूसरी, लड़की जो अब उसकी पत्नी भी थी का मोबाइल बंद था और तीसरी सावन की रिमझिम बरसती-थमती काली रात को ध्यान में रखें तो घटना की संगती ठीक-ठीक बैठेगी. हां तो इन सब बातों के परिणामस्वरूप लड़का स्टेशन के पास ही किसी होटल में रात गुजारने की योजना बनाता है. होटल के कमरे में पहुंचते ही उसके मन में एक विकार जन्म लेता है जो पूरी घटना के लिए बीज का काम करता है. थोड़े मोल-भाव के बाद होटल का लड़का व्यवस्था कर देता है. लगभग आधे घंटे बाद उसके कमरे की कॉलबेल बजती है. रगों में दौड़ते लहू को संयमित करता हुआ वह ज्यों ही दरवाजा खोलता है वह घटना घट जाती है जिसका इंतजार आप कर रहे हैं. दरवाजे पर उस नौजवान की वही बीवी खड़ी थी जिसका मोबाइल बंद था और जिसे सावन की इस अंधेरी रात में पाना नौजवान को असंभव लग रहा था. इस दृश्य को देखकर देवताओं ने फूल बरसाए अथवा नहीं ये तो जानकारी नहीं है परंतु स्त्री-पुरुष की समानता के पक्षधर लोगों ने जरूर तालियां बजाई. पति-पत्नी को समानता के ऐसे धरातल पर फिर कभी किसी ने नहीं देखा. नौजवान के कमरे से संगीत की मधुर पार्श्व ध्वनि सुनाई दे रही थी, मन क्यूं बहका रे बहका आधी रात को..........???
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