ये कितने सुकून की बात है
कि रात हमेशां आ जाती है
अपने तय समय पर
सबके लिए बराबर की छूट लेकर
कितना खतरनाक होता अगर रात पर भी विशेषाधिकार होता
कुछ सुविधा संपन्नों का
दिन भर रिक्शा चलाकर थक चुका रग्घू
खेत की मेड़ पर बैठा
बकरियां चराता घीसा
मालिक के इशारे पर उठता-बैठता रामू
मिट्टी खोदता मेघा
और दूध पीते बच्चे को घर पर छोड़कर
साहब के घर काम कर रही बाई
सभी का संबल है रात
क्योंकि रात फ़कत आराम नहीं देती
बराबर की आजादी भी देती है
I liked it...Sir
ReplyDeleteI liked it.....Sir
ReplyDeleteawesome sir...
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