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असुर सदैव बली रहेंगे, क्योंकि सुर तो केवल किसी के भरोसे हैं. ऋत् पर ही सही, निर्भर हैं. और असुर, - दुरभिसंधि मैं लगे ही सही- निरंतर कर्म- तत्पर हैं. - अज्ञेय

Wednesday, 15 June 2011

चुनौती


गर्मियों की छुट्टियों में
गांव आए शहराती बच्चे ने
रिश्ते के दादा को
जब अंकल कहा तो
वह जैसे उखड़ गए
और भाषा के इस खालीपन पर
प्रतिप्रश्न-सा करते हुए
बच्चे से इसका अर्थ पूछ बैठे
बच्चा जो बेहद होशियार था
मासूमियत-से बोला
जिसे हम जानते नहीं उसे अंकल कहते हैं
गांव के बुजूर्ग ने अपनी शंका की पुष्टि कर ली
बच्चे ने बिना कोई रिश्ता जोड़े
उसे अंकल कहा था
अब प्रश्न केवल भाषा का नहीं रह गया था
उसमें और भी कुछ अनुपस्थित था
बुजुर्ग ने कसम खाई
आज के बाद वह हर किसी को बेटा नहीं कहेगा
बुजुर्ग के साथ-साथ
यह भाषा के लिए भी एक चुनौती थी.

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