प्रवेश.....
ब्लोगिंग में बिल्कुल नया हूं.हिंदी में टाइप करना भी एक चुनौती है.बस कोशिश कर रहा हूं.शुरुआत त्रिलोचन की एक कविता से...........
अपना ही घर
महल खड़ा करने की इच्छा है शब्दों का
जिसमें सब रह सकें रम सकें
लेकिन सांचा ईंट बनाने का
मिला नहीं है, श्ब्दों का
समय लग गया
केवल कामचलाऊ ढांचा
किसी तरह तैयार किया है.
सबकी बोली-ठोली, लाग-लपेट, टेक, भाषा,
मुहावरा, भाव, आचरण,इंगित, विशेषता
फिर भोली-भूली इच्छाएं
इतिहास विश्व का,
बिखरा हुआ रूप सौंदर्य भूमिका
स्वर की धारा
विविध तरंग-भंग भरती लहराती
गाती, चिल्लाती, इठलाती
फिर मनुष्य, आवारा, गृही, असभ्य, सभ्य
शहराती या देहाती-
सबके लिए निमंत्रण है
अपना जन जानें और पधारें
इसको अपना ही घर मानें.
-त्रिलोचन
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है मित्र !
ReplyDeleteनिरंतरता बनाए रखें।
अभिव्यक्ति के नए आयाम स्थापित करें आप, ऎसी कामना है।
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है मित्र !
ReplyDeleteअसुर सदैव बली रहेंगे, क्योंकि सुर तो केवल किसी के भरोसे हैं.
Its good!!!!!!!!!!
ReplyDeletenot anonymous..........im Yashika from std.9th- a
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